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बिहार: एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी की तेरहवीं पर मुठभेड़ स्थल पर लगे नारे, मां ने सम्राट और उनकी पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

बिहार के एक ग्रामीण इलाके में हाल ही में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी की तेरहवीं के अवसर पर एक भावनात्मक और तनावपूर्ण माहौल देखने...

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Author: Jagraj Published: 30 Jun 2026, 2:52 PM Updated: 30 Jun 2026, 9:05 PM Views: 4
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बिहार के एक ग्रामीण इलाके में हाल ही में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी की तेरहवीं के अवसर पर एक भावनात्मक और तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। यह पारंपरिक शोक समारोह, जो मृत्यु के तेरहवें दिन आयोजित किया जाता है, मुठभेड़ स्थल के पास ही संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिवार के सदस्य एकत्रित हुए। इस दौरान, घटनास्थल पर सरकार और पुलिस के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई, जिसने स्थानीय लोगों के बीच व्याप्त असंतोष और गुस्से को स्पष्ट रूप से उजागर किया।

Photo: 112 Uttar Pradesh / Pexels

भरत तिवारी की मां ने इस अवसर पर मीडिया के सामने आकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सीधे तौर पर 'सम्राट' और उनकी पुलिस को अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार ठहराया। मां का दावा है कि उनका बेटा निर्दोष था और उसे एक सुनियोजित साजिश के तहत मार दिया गया। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मुठभेड़ फर्जी थी और उनके बेटे को न्याय मिलना चाहिए। ये आरोप स्थानीय प्रशासन और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं।

ग्रामीणों ने भी भरत तिवारी की मां के आरोपों का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि भरत एक साधारण व्यक्ति था जिसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने बिना किसी ठोस सबूत के भरत को निशाना बनाया और यह घटना पुलिस की बर्बरता का एक और उदाहरण है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में भय और अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे पुलिस-जनता संबंध और भी तनावपूर्ण हो गए हैं।

Photo: Tope J. Asokere / Pexels

तेरहवीं के दौरान लगाए गए नारों में न्याय की मांग और पुलिस कार्रवाई की जांच की अपील प्रमुख थी। उपस्थित लोगों ने उच्च-स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। इस विरोध प्रदर्शन ने यह भी संकेत दिया कि यह घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर स्थानीय समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया है।

स्थानीय प्रशासन ने अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है। पुलिस अधिकारियों ने मुठभेड़ को वैध ठहराते हुए कहा था कि भरत तिवारी एक अपराधी था और उसने पुलिस पर पहले हमला किया था, जिसके जवाब में पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। हालांकि, मां और ग्रामीणों के बयान इन आधिकारिक दावों के बिल्कुल विपरीत हैं, जिससे मामले की सच्चाई पर संदेह गहरा गया है।

Photo: RDNE Stock project / Pexels

इस घटना ने बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस की कार्यप्रणाली पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जिससे यह मामला राजनीतिक रंग ले रहा है। वे पुलिस मुठभेड़ों की बढ़ती संख्या और उनकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, और एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं।

भरत तिवारी की मौत के बाद से ही क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है और स्थानीय समुदाय उनके साथ खड़ा है। तेरहवीं का यह कार्यक्रम न केवल एक शोक सभा थी, बल्कि यह न्याय के लिए एक सामूहिक आवाज भी बन गया, जिसने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है।

इस पूरे प्रकरण में 'सम्राट' का उल्लेख महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि 'सम्राट' किसी व्यक्ति विशेष को संदर्भित करता है या यह किसी सरकारी अधिकारी या राजनीतिक हस्ती का उपनाम है। मां के आरोप सीधे तौर पर उन्हें और उनकी पुलिस को लक्षित करते हैं, जिससे इस मामले की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।

यह घटना दर्शाती है कि कैसे पुलिस मुठभेड़ें अक्सर स्थानीय समुदायों में गहरे घाव छोड़ जाती हैं और विश्वास की कमी पैदा करती हैं। जब तक इन घटनाओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं होती, तब तक जनता का विश्वास बहाल करना मुश्किल होगा।

परिवार ने मानवाधिकार संगठनों से भी संपर्क करने की बात कही है, ताकि इस मामले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके। उनका मानना है कि केवल एक व्यापक जांच ही उनके बेटे को न्याय दिला सकती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक सकती है।

आने वाले दिनों में इस मामले पर और अधिक राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ने की संभावना है। सरकार को इन गंभीर आरोपों पर ध्यान देना होगा और एक पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी होगी ताकि न्याय की प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बना रहे।

ग्रामीणों का कहना है कि वे तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे जब तक कि भरत तिवारी की मौत के पीछे की पूरी सच्चाई सामने नहीं आ जाती और दोषियों को सजा नहीं मिल जाती। यह घटना बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है कि वह अपने नागरिकों के अधिकारों और न्याय के प्रति कितनी प्रतिबद्ध है।

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Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

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