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मध्य प्रदेश: सीएम मोहन यादव को लेकर 'ज़मीन सौदे' से जुड़े आरोपों पर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े एक कथित ज़मीन सौदे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक बया...

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Author: Jagraj Published: 26 Jun 2026, 10:15 PM Updated: 5 Jul 2026, 2:52 PM Views: 32
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मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े एक कथित ज़मीन सौदे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर सीधे तौर पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है, जिसके बाद भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए पलटवार किया है। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में एक नया उबाल लेकर आया है, जहां आगामी चुनावों से पहले दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

Photo: Sandeep Kashyap / Pexels

विपक्षी दल कांग्रेस ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव या उनके परिवार से जुड़े व्यक्तियों ने एक ऐसी ज़मीन के सौदे में शामिल थे, जिसमें नियमों का उल्लंघन किया गया है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कुछ दस्तावेज़ों का हवाला दिया, हालांकि उनकी सत्यता अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुई है। इन आरोपों में मुख्य रूप से ज़मीन के मूल्यांकन, खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया और सरकारी अनुमतियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इस सौदे में पारदर्शिता की कमी थी और इसमें पद का दुरुपयोग किया गया है।

इन आरोपों के जवाब में, भाजपा ने कांग्रेस पर 'झूठे और मनगढ़ंत' आरोप लगाने का आरोप लगाया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह विपक्षी दल की हताशा का परिणाम है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस के पास सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह व्यक्तिगत चरित्र हनन और निराधार आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।

भाजपा नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव का इस कथित सौदे से कोई सीधा संबंध नहीं है और जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे दुर्भावनापूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि सभी लेनदेन कानूनी रूप से और नियमानुसार किए गए हैं, और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस से अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने की मांग की है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। राज्य में अगले कुछ वर्षों में विधानसभा चुनाव होने हैं, और दोनों दल अभी से अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं। इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान को और बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Photo: Sandeep Kashyap / Pexels

कांग्रेस के आरोपों के बाद, सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गरमा गया है। दोनों दलों के समर्थक अपने-अपने नेताओं के बचाव में और विरोध में पोस्ट कर रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह 'ज़मीन सौदा' विवाद जल्द शांत होने वाला नहीं है और आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से राज्य की राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। यदि कांग्रेस अपने आरोपों को पुख्ता सबूतों के साथ साबित कर पाती है, तो यह भाजपा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। वहीं, यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो कांग्रेस की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।

फिलहाल, भाजपा ने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है, जबकि कांग्रेस ने अपनी मांग दोहराई है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।

यह देखना दिलचस्प होगा कि यह 'ज़मीन सौदा' विवाद किस दिशा में जाता है। क्या कांग्रेस अपने आरोपों को साबित कर पाएगी या भाजपा इन आरोपों को सफलतापूर्वक खारिज कर देगी? आने वाले दिनों में इस मामले पर और अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है, जिससे इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

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