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रेलवे के तत्काल सिस्टम में नया स्कैम! सिर्फ 10 सेकंड के खेल से मुंबई में बुक हो रहा टिकट, बिहार में छप रहा नकली प्रिंट

भारतीय रेलवे के तत्काल टिकट बुकिंग सिस्टम में एक नए और संगठित घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसने यात्रियों और अधिकारियों दोनों को चौंका दिय...

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Author: Jagraj Published: 26 Jun 2026, 10:14 PM Updated: 5 Jul 2026, 2:52 PM Views: 31
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भारतीय रेलवे के तत्काल टिकट बुकिंग सिस्टम में एक नए और संगठित घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसने यात्रियों और अधिकारियों दोनों को चौंका दिया है। यह घोटाला इतना शातिर है कि मुंबई जैसे बड़े शहरों में तत्काल टिकट मात्र 10 सेकंड के भीतर बुक किए जा रहे हैं, जबकि इन टिकटों के नकली प्रिंट बिहार जैसे दूरदराज के इलाकों में जारी किए जा रहे हैं। इस पूरे रैकेट में कई परतों पर मिलीभगत और तकनीकी हेरफेर की आशंका जताई जा रही है, जो रेलवे की सुरक्षा प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Photo: dharam veer / Pexels

यह पूरा मामला तब सामने आया जब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और अन्य जांच एजेंसियों ने कुछ संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखनी शुरू की। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कुछ एजेंट या समूह विशेष सॉफ्टवेयर और तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जो उन्हें सामान्य उपयोगकर्ताओं की तुलना में बहुत तेजी से टिकट बुक करने में सक्षम बनाते हैं। तत्काल टिकटों की सीमित उपलब्धता और उच्च मांग को देखते हुए, यह तकनीक उन्हें एक अनुचित लाभ प्रदान करती है।

घोटाले का दूसरा पहलू बिहार में नकली प्रिंट जारी करना है। ऐसा प्रतीत होता है कि मुंबई में बुक किए गए वास्तविक टिकटों का डेटा किसी तरह से हासिल किया जा रहा है, और फिर उन पर आधारित नकली प्रिंटआउट बनाए जा रहे हैं। ये नकली टिकट उन यात्रियों को बेचे जा रहे हैं जो तत्काल सेवा का लाभ उठाना चाहते हैं लेकिन वास्तविक टिकट प्राप्त करने में असमर्थ रहते हैं। यह धोखाधड़ी यात्रियों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें यात्रा के दौरान कानूनी समस्याओं में भी डाल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के घोटाले को अंजाम देने के लिए रेलवे के आंतरिक सिस्टम की जानकारी और तकनीकी कौशल दोनों की आवश्यकता होती है। यह संभव है कि कुछ रेलवे कर्मचारी या पूर्व कर्मचारी इस रैकेट में शामिल हों, जो सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं। इसके अलावा, ऐसे विशेष सॉफ्टवेयर जो कैप्चा को बायपास कर सकते हैं या डेटा एंट्री को स्वचालित कर सकते हैं, भी इस घोटाले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं।

तत्काल बुकिंग प्रणाली भारतीय रेलवे द्वारा उन यात्रियों के लिए शुरू की गई थी जिन्हें आपातकालीन यात्रा करनी होती है। हालांकि, इसकी शुरुआत से ही इसमें अनियमितताओं और दलालों की घुसपैठ की शिकायतें आती रही हैं। यह नया घोटाला इन शिकायतों को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहां न केवल टिकटों की कालाबाजारी हो रही है, बल्कि नकली दस्तावेज़ भी बनाए जा रहे हैं।

Photo: Shantum Singh / Pexels

रेलवे प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। RPF और साइबर क्राइम टीमें मिलकर काम कर रही हैं ताकि इस रैकेट के मास्टरमाइंड्स और इसमें शामिल सभी लोगों को पकड़ा जा सके। इसके साथ ही, रेलवे अपने तत्काल बुकिंग सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करने और ऐसी तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए भी कदम उठा रहा है जिनका फायदा उठाया जा रहा है।

यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक रेलवे चैनलों, जैसे IRCTC वेबसाइट या अधिकृत टिकट काउंटरों से ही टिकट खरीदें। किसी भी अनाधिकृत एजेंट या संदिग्ध वेबसाइट से टिकट खरीदने से बचें, क्योंकि इससे उन्हें नकली टिकट मिल सकते हैं और उनकी यात्रा बाधित हो सकती है। रेलवे ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं जहां यात्री ऐसी किसी भी धोखाधड़ी की रिपोर्ट कर सकते हैं।

इस घोटाले का पर्दाफाश भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह न केवल उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल करता है, बल्कि लाखों यात्रियों के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है। सरकार और रेलवे बोर्ड पर दबाव है कि वे इस समस्या का स्थायी समाधान खोजें और यह सुनिश्चित करें कि तत्काल बुकिंग प्रणाली केवल वास्तविक जरूरतमंद यात्रियों के लिए ही उपलब्ध हो।

आगे की जांच में यह भी सामने आ सकता है कि यह रैकेट कितने बड़े पैमाने पर फैला हुआ है और इसमें कितने लोग शामिल हैं। यह देखना होगा कि रेलवे अपनी सुरक्षा प्रणालियों को कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी ढंग से मजबूत कर पाता है ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके और यात्रियों को एक सुरक्षित और विश्वसनीय यात्रा अनुभव प्रदान किया जा सके।

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Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

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