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बागी सांसद बोले- ठाकरे गुट कांग्रेस में विलय चाहता है: इसलिए अलग हुए; स्पीकर को चिट्ठी सौंपी, शिवसेना शिंदे गुट ने किया समर्थन

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) गुट के बीच...

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Author: Jagraj Published: 21 Jun 2026, 5:01 AM Updated: 5 Jul 2026, 2:52 PM Views: 53
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। हाल ही में, ठाकरे गुट से अलग हुए कुछ सांसदों ने एक बड़ा दावा किया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इन बागी सांसदों का कहना है कि उन्होंने ठाकरे गुट से इसलिए नाता तोड़ा क्योंकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला धड़ा कांग्रेस पार्टी में विलय करना चाहता था।

Photo: Tara Winstead / Pexels

बागी सांसदों ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र भी सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने अपने अलग होने के कारणों का विस्तार से उल्लेख किया है और ठाकरे गुट के कथित विलय की मंशा को अपने फैसले का मुख्य आधार बताया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब दोनों शिवसेना गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई लगातार तेज होती जा रही है।

इन आरोपों को शिवसेना (एकनाथ शिंदे) गुट का तत्काल समर्थन मिला है। शिंदे गुट ने बागी सांसदों के दावों को 'सच्चाई' करार दिया है और कहा है कि यह उनकी स्थिति की पुष्टि करता है कि ठाकरे गुट अपनी मूल विचारधारा से भटक गया है। शिंदे गुट के नेताओं ने पहले भी आरोप लगाए हैं कि उद्धव ठाकरे महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन के तहत कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर शिवसेना की पहचान को कमजोर कर रहे हैं।

बागी सांसदों के इस बयान से राजनीतिक विश्लेषक महाराष्ट्र में भविष्य की राजनीतिक समीकरणों पर कयास लगा रहे हैं। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका उद्धव ठाकरे गुट की राजनीतिक विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है। वहीं, शिंदे गुट को अपनी स्थिति को और मजबूत करने का मौका मिल सकता है, खासकर उन शिवसैनिकों के बीच जो पार्टी की हिंदुत्ववादी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

फिलहाल, उद्धव ठाकरे गुट की ओर से इन आरोपों पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, उम्मीद है कि आने वाले दिनों में वे इन दावों का खंडन करेंगे और अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इस पत्र पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या यह मामला आगे चलकर कोई नया मोड़ लेता है।

यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। दोनों गुटों के बीच कानूनी और राजनीतिक लड़ाई पहले से ही चल रही है, और यह नया आरोप निश्चित रूप से इस संघर्ष को और गहरा करेगा। आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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Staff Reporter at VG Khabar.

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