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Chhattisgarh

भारी विरोध के बीच चलने लगा बुलडोजर: नकटी गांव में विधायक कॉलोनी के लिए पूरा मोहल्ला ध्वस्त

नकटी गांव में एक विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए पूरे मोहल्ले को ध्वस्त करने की कार्रवाई भारी विरोध के बावजूद शुरू हो गई है।

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Author: Jagraj Published: 29 Jun 2026, 2:15 PM Updated: 14 Jul 2026, 11:24 AM Views: 17
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नकटी गांव में एक विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए पूरे मोहल्ले को ध्वस्त करने की कार्रवाई भारी विरोध के बावजूद शुरू हो गई है। स्थानीय निवासियों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है, लेकिन प्रशासन ने अपनी कार्रवाई जारी रखी। यह घटना स्थानीय लोगों के अधिकारों और विकास परियोजनाओं के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है।

Photo: Mike Bird / Pexels

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त मुआवजा या वैकल्पिक आवास की व्यवस्था किए बिना ही उनके घरों से बेदखल किया जा रहा है। कई परिवार दशकों से इस जगह पर रह रहे हैं और उनके पास अपनी आजीविका का कोई अन्य साधन नहीं है। उनके अनुसार, सरकार को विकास परियोजनाओं को लागू करते समय मानवीय पहलुओं पर भी विचार करना चाहिए।

स्थानीय लोगों का आक्रोश और प्रशासन का रुख

सुबह से ही नकटी गांव में तनाव का माहौल था। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। जैसे ही बुलडोजर घटनास्थल पर पहुंचे, सैकड़ों ग्रामीण अपने घरों के सामने जमा हो गए और 'हमें न्याय चाहिए' और 'हमारे घर मत तोड़ो' जैसे नारे लगाने लगे।

Photo: CP Khanal / Pexels

स्थानीय महिलाएँ और बच्चे भी विरोध प्रदर्शन में शामिल थे, जो अपनी आँखों के सामने अपने घरों को टूटते हुए देख रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बुलडोजर के सामने लेटने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पुलिस ने हटा दिया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।

हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें जो मुआवजा दिया जा रहा है वह बाजार मूल्य से बहुत कम है और उससे वे कहीं और घर नहीं खरीद सकते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें विस्थापन के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जिससे वे अपनी संपत्ति और सामान निकालने में असमर्थ रहे।

Photo: Diana Khwaelid / Pexels

यह परियोजना एक महत्वाकांक्षी विधायक कॉलोनी का हिस्सा है, जिसे क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि इस कॉलोनी के निर्माण से क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं और बुनियादी ढांचा उपलब्ध होगा, जिससे समग्र विकास को गति मिलेगी।

लेकिन, स्थानीय लोगों के लिए यह विकास उनके अस्तित्व पर खतरा बन गया है। वे अपने पैतृक घरों और सामुदायिक जीवन को खोने के डर से आक्रोशित हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार संगठन भी इस मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं और सरकार से पुनर्वास और मुआवजे के लिए एक न्यायसंगत नीति बनाने की मांग कर रहे हैं।

यह घटना एक बार फिर से विकास परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के बीच संतुलन साधने की चुनौती को सामने लाती है। अक्सर, विकास के नाम पर कमजोर वर्गों को विस्थापित होना पड़ता है, जिससे उनके जीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सरकार को ऐसी परियोजनाओं को लागू करते समय अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें प्रभावित लोगों की आवाज सुनी जाए और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जाए। केवल तभी विकास समावेशी और स्थायी हो सकता है।

विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, बुलडोजर अपना काम करते रहे और कई घर पहले ही ध्वस्त किए जा चुके हैं। ग्रामीणों ने अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया है और वे कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच इस गतिरोध का क्या समाधान निकलता है।

इस बीच, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाया है और सरकार पर गरीबों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल पुनर्वास और पर्याप्त मुआवजे की व्यवस्था की जाए। यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों में भी गरमा गया है।

यह घटना देश भर में भूमि अधिग्रहण और विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापन के व्यापक मुद्दे को दर्शाती है। ऐसे मामलों में अक्सर पारदर्शिता की कमी और प्रभावित लोगों के साथ उचित परामर्श का अभाव देखा जाता है, जिससे तनाव और संघर्ष पैदा होता है।

नकटी गांव का यह मामला एक चेतावनी है कि विकास को केवल आर्थिक आंकड़ों के आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए, बल्कि इसके सामाजिक और मानवीय प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। एक न्यायपूर्ण समाज के लिए यह आवश्यक है कि कोई भी विकास परियोजना किसी भी व्यक्ति को बेघर या असहाय न करे।

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Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

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