अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद से ही, मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इन सवालों के केंद्र में अक्सर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम आता है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि चंपत राय कौन हैं और राम मंदिर आंदोलन तथा ट्रस्ट में उनकी क्या भूमिका रही है।
Photo: Dinesh Kalola / Pexelsचंपत राय का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुआ था। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक वरिष्ठ प्रचारक हैं। उन्होंने अपना जीवन संघ को समर्पित कर दिया है और विभिन्न पदों पर रहते हुए संगठन के लिए काम किया है। उनकी पहचान एक अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में होती है।
राम जन्मभूमि आंदोलन से चंपत राय का जुड़ाव काफी पुराना है। वे इस आंदोलन के शुरुआती दौर से ही सक्रिय रहे हैं और उन्होंने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद, जब राम मंदिर निर्माण का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, तब भी वे इस प्रक्रिया से जुड़े रहे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया, तो चंपत राय को इसका महासचिव नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए, वे मंदिर निर्माण के सभी प्रमुख निर्णयों और गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल रहे हैं। मंदिर निर्माण की प्रगति और उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।
हाल के दिनों में, ट्रस्ट के भूमि खरीद से जुड़े कुछ फैसलों और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर कुछ वर्गों द्वारा सवाल उठाए गए हैं। इन सवालों के जवाब देने और ट्रस्ट के कार्यों का बचाव करने में चंपत राय ने प्रमुख भूमिका निभाई है। वे अक्सर मीडिया के सामने आकर ट्रस्ट का पक्ष रखते हैं।
चंपत राय का मानना है कि मंदिर निर्माण का कार्य पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ किया जा रहा है। वे आरोपों को निराधार बताते हुए कहते हैं कि ट्रस्ट हर निर्णय जनहित और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर लेता है। उनकी उपस्थिति ट्रस्ट के सार्वजनिक चेहरे के रूप में बनी हुई है।
कुल मिलाकर, चंपत राय राम मंदिर ट्रस्ट के एक केंद्रीय व्यक्ति हैं, जिनकी भूमिका मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन पर उठने वाले सवाल ट्रस्ट के समग्र कामकाज पर सवाल उठाते हैं, और उनके जवाब मंदिर के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।