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एमडी-एमएस अवकाश मंजूर, पुराने डॉक्टर इंतजार

एमडी-एमएस के लिए 3 साल का अवकाश मंजूर, पुराने बैच के डॉक्टर अब भी इंतजार में; समान न्याय की मांग तेज।

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Author: Simran Published: 11 Apr 2026, 5:47 PM Updated: 11 Apr 2026, 5:47 PM Views: 82
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नए बैच को मिली राहत, पुराने डॉक्टरों में बढ़ी नाराजगी

राज्य के सरकारी डॉक्टरों के लिए एमडी-एमएस करने हेतु 3 साल का अवकाश मंजूर किए जाने के फैसले के बाद अब पुराने बैच के डॉक्टरों में असंतोष बढ़ गया है। नए बैच के डॉक्टरों को जहां उच्च शिक्षा के लिए अवकाश की सुविधा मिल गई है, वहीं पहले से कार्यरत कई डॉक्टर अब भी अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। इससे डॉक्टरों के बीच असमानता और न्याय की मांग तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा हाल ही में कुछ डॉक्टरों को एमडी-एमएस करने के लिए 3 वर्ष का अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया गया है। इस फैसले से नए बैच के डॉक्टरों को राहत मिली है, लेकिन पुराने बैच के डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से अनुमति नहीं मिल रही है।

पुराने बैच के डॉक्टरों ने उठाए सवाल

पुराने बैच के डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने कई साल पहले ही एमडी-एमएस के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक उन्हें अध्ययन अवकाश नहीं मिला है। उनका आरोप है कि नए डॉक्टरों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे उनके साथ अन्याय हो रहा है।

डॉक्टरों का कहना है कि यदि समान नीति लागू नहीं की गई तो यह निर्णय भेदभावपूर्ण माना जाएगा। उन्होंने इस मामले में पारदर्शिता और समान अवसर की मांग की है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जुड़ा मामला

सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में डॉक्टरों को एमडी-एमएस करने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी माना जा रहा है।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मानकों के अनुसार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।

लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यदि सभी को समान अवसर नहीं दिया गया तो यह नीति प्रभावी नहीं होगी।

डॉक्टरों ने की समान अवसर की मांग

पुराने बैच के डॉक्टरों ने मांग की है कि:

  • सभी पात्र डॉक्टरों को अध्ययन अवकाश दिया जाए
  • पुराने आवेदनों को प्राथमिकता दी जाए
  • स्पष्ट नीति जारी की जाए
  • चयन प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए

डॉक्टरों का कहना है कि इससे विवाद खत्म होगा और सभी को न्याय मिलेगा।

अस्पतालों में सेवाओं पर पड़ सकता है असर

यदि बड़ी संख्या में डॉक्टर अध्ययन अवकाश पर जाते हैं, तो अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी बढ़ सकती है।

इसलिए प्रशासन को संतुलन बनाना होगा ताकि मरीजों की सेवाएं प्रभावित न हों।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अवकाश मंजूरी देते समय अस्पतालों की जरूरतों का भी ध्यान रखा जा रहा है।

लंबे समय से लंबित हैं आवेदन

डॉक्टरों का कहना है कि कई आवेदन महीनों से लंबित हैं। कुछ डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने कई बार आवेदन किया लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

इससे डॉक्टरों में निराशा बढ़ रही है।

डॉक्टर संघ ने भी उठाया मुद्दा

डॉक्टरों के संगठन ने भी इस मामले को उठाया है। उन्होंने सरकार से समान नीति लागू करने की मांग की है।

डॉक्टर संघ का कहना है कि सभी डॉक्टरों को समान अवसर मिलना चाहिए।

सरकार ने मांगी जानकारी

मामले को लेकर प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।

अधिकारियों का कहना है कि सभी लंबित आवेदनों की समीक्षा की जाएगी।

जल्द समाधान की उम्मीद

सरकार का कहना है कि इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि पात्र डॉक्टरों को प्राथमिकता दी जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत

विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एमडी-एमएस करने के बाद डॉक्टर विशेषज्ञ सेवाएं दे सकेंगे।

इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होंगी।

डॉक्टरों की चिंता बनी हुई

हालांकि, पुराने बैच के डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उन्हें अनुमति नहीं मिलती, उनकी चिंता बनी रहेगी।

उन्होंने जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

निष्कर्ष

एमडी-एमएस के लिए 3 साल का अध्ययन अवकाश मंजूर किए जाने से नए डॉक्टरों को राहत मिली है, लेकिन पुराने बैच के डॉक्टर अब भी इंतजार कर रहे हैं। इससे असमानता और न्याय की मांग उठ रही है। सरकार ने मामले की समीक्षा का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि पुराने डॉक्टरों को कब राहत मिलती है और यह विवाद कब खत्म होता है।

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Simran

Simran is a passionate journalist who reports on politics, public policy, and social issues. Her work focuses on delivering reliable news, in-depth insights, and timely updates to readers.

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