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हिंदुत्व राष्ट्रवाद का एक और नमूना..': छत्तीसगढ़ HC ने एक टिप्पणी की और RSS पर भड़क गए असदुद्दीन ओवैसी

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में की गई एक टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, विशेष रूप से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेह...

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Author: Jagraj Published: 3 Jul 2026, 4:50 PM Updated: 5 Jul 2026, 2:52 PM Views: 9
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में की गई एक टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, विशेष रूप से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ओवैसी ने इस टिप्पणी को 'हिंदुत्व राष्ट्रवाद का एक और नमूना' बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर जमकर निशाना साधा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब देश में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की बहस पहले से ही गर्म है।

Photo: Sandeep Kashyap / Pexels

मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की उस टिप्पणी से जुड़ा है जिसमें अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका और उसके सिद्धांतों का उल्लेख किया गया था। हालांकि टिप्पणी का सटीक पाठ सार्वजनिक रूप से विस्तृत नहीं किया गया है, लेकिन इसके निहितार्थों को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों और नेताओं के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है। ओवैसी के अनुसार, यह टिप्पणी न्यायपालिका में भी एक विशेष विचारधारा के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।

ओवैसी का तीखा हमला और आरएसएस पर आरोप

असदुद्दीन ओवैसी, जो अपनी मुखर और बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं, ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की टिप्पणी को तुरंत हिंदुत्व के एजेंडे से जोड़ दिया। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर आरएसएस को 'देश के संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने' और 'एक विशेष विचारधारा को थोपने' का आरोप लगाया। ओवैसी ने कहा कि ऐसी न्यायिक टिप्पणियां 'धर्मनिरपेक्ष भारत की नींव' के लिए खतरा हैं।

Photo: Voters Party International / Pexels

ओवैसी ने अपने बयान में तर्क दिया कि आरएसएस, जो खुद को एक सांस्कृतिक संगठन बताता है, वास्तव में एक राजनीतिक शक्ति के रूप में काम कर रहा है और विभिन्न संस्थानों में अपनी विचारधारा का प्रसार कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक प्रणाली को किसी भी राजनीतिक या वैचारिक प्रभाव से मुक्त रहना चाहिए ताकि न्याय की निष्पक्षता बनी रहे।

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अल्पसंख्यकों और हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच 'अविश्वास और भय' पैदा करती हैं। ओवैसी ने सरकार से इस मामले पर ध्यान देने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनी रहे।

Photo: Voters Party International / Pexels

आरएसएस की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, आरएसएस के समर्थक और भाजपा के नेता अक्सर इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि आरएसएस एक देशभक्त संगठन है जो देश के सांस्कृतिक उत्थान के लिए काम करता है और उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है।

यह पहली बार नहीं है जब ओवैसी ने आरएसएस और हिंदुत्व राष्ट्रवाद पर हमला किया है। वह लगातार इन मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं और अक्सर भाजपा और उसके वैचारिक संरक्षक आरएसएस पर निशाना साधते रहे हैं। उनकी टिप्पणियां अक्सर राजनीतिक बहस को गरमा देती हैं और विभिन्न पक्षों से प्रतिक्रियाएं आमंत्रित करती हैं।

इस घटनाक्रम से देश में हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और न्यायपालिका की भूमिका पर चल रही बहस को और बल मिला है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और क्या मोड़ लेता है और अन्य राजनीतिक दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं देश के सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं। न्यायपालिका की टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हमेशा से संवेदनशील रही हैं, और यह मामला भी कोई अपवाद नहीं है।

यह घटना भारतीय राजनीति में वैचारिक ध्रुवीकरण को भी दर्शाती है, जहां विभिन्न विचारधाराओं के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। ओवैसी जैसे नेता इन टकरावों को सार्वजनिक मंच पर मुखर रूप से उठाते हैं, जिससे बहस और तेज होती है।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की टिप्पणी और उस पर असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर देश में हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और संवैधानिक मूल्यों पर बहस को केंद्र में ला दिया है। यह मुद्दा आने वाले समय में भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना रहेगा।

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Staff Reporter at VG Khabar.

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