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सरकार ने बहुत गलत किया', जेड सिक्योरिटी तो मिली मगर बंगला हाथ से निकलने पर बोले लालू

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख और बिहार की राजनीति के कद्दावर नेता लालू प्रसाद यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है।

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Author: Jagraj Published: 4 Jul 2026, 4:18 PM Updated: 16 Aug 2026, 2:56 AM Views: 11
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राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख और बिहार की राजनीति के कद्दावर नेता लालू प्रसाद यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्हें जेड-प्लस सुरक्षा तो प्रदान की गई है, लेकिन इसके बावजूद उनके सरकारी बंगले को खाली कराए जाने के फैसले पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। लालू यादव ने इस कार्रवाई को 'बहुत गलत' करार दिया है और इसे राजनीतिक प्रतिशोध का एक और उदाहरण बताया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश में राजनीतिक गहमागहमी अपने चरम पर है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

Photo: Abhiraj Mengade / Pexels

लालू प्रसाद यादव, जो चारा घोटाला मामलों में कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं, को हाल ही में दिल्ली या पटना में आवंटित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिला था। यह नोटिस ऐसे समय में आया जब उनकी सुरक्षा को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, खासकर उनके स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र को देखते हुए। जेड-प्लस सुरक्षा, जो देश की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक है, उन्हें प्रदान की गई है, लेकिन आवास का मुद्दा अब एक नया विवाद बन गया है।

राजद सुप्रीमो ने कहा कि सरकार ने एक तरफ उन्हें उच्च-स्तरीय सुरक्षा दी है, वहीं दूसरी तरफ उनके रहने के ठिकाने को छीनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इस विरोधाभास पर सवाल उठाया और कहा कि यह कदम उन्हें और उनके परिवार को परेशान करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। लालू यादव के समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले की कड़ी निंदा की है, इसे 'तानाशाही' और 'लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ' बताया है।

Photo: Pratheek K / Pexels

यह कोई पहली बार नहीं है जब लालू यादव को सरकारी आवास से जुड़े विवादों का सामना करना पड़ा हो। अतीत में भी उनके दिल्ली और पटना स्थित आवासों को लेकर कई बार खबरें आती रही हैं। हालांकि, इस बार जेड-प्लस सुरक्षा के साथ बंगले के मुद्दे को जोड़कर उन्होंने सरकार पर सीधा हमला बोला है, जिससे यह मामला और भी गरमा गया है। राजद नेताओं का कहना है कि यह केवल एक आवास का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक वरिष्ठ नेता के सम्मान और गरिमा से जुड़ा प्रश्न है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकता है। लालू यादव, भले ही वे सक्रिय राजनीति में पहले जैसे सक्रिय न हों, लेकिन उनकी बयानबाजी और उनके इर्द-गिर्द के मुद्दे हमेशा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने रहते हैं। उनके समर्थक इसे केंद्र सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

Photo: Hoài Nam / Pexels

दूसरी ओर, सरकार के सूत्रों ने अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, आमतौर पर सरकारी आवासों का आवंटन और खाली कराना नियमों और नीतियों के तहत होता है, और कई बार अदालती आदेशों या निर्धारित समय-सीमा के उल्लंघन के कारण भी ऐसे कदम उठाए जाते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले पर क्या रुख अपनाती है और लालू यादव की इन टिप्पणियों पर क्या जवाब देती है।

राजद ने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का फैसला किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि वे इस 'अन्यायपूर्ण' फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि लालू प्रसाद यादव को सम्मानजनक आवास मिले। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बिहार में आगामी राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई है, जहां राजद अभी भी एक प्रमुख शक्ति है।

लालू यादव के स्वास्थ्य को देखते हुए, उनके आवास का मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है। उन्हें नियमित चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है, और एक स्थिर और उपयुक्त आवास उनके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में, सरकारी बंगले को खाली कराने का निर्णय उनके लिए और उनके परिवार के लिए अतिरिक्त परेशानी का सबब बन सकता है।

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब देश में विपक्षी एकता की बातें चल रही हैं। लालू यादव, जो हमेशा विपक्षी दलों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं, उनके साथ हुई इस घटना को अन्य विपक्षी दल भी सहानुभूति के साथ देख सकते हैं। यह केंद्र सरकार के खिलाफ एक साझा मोर्चा बनाने में सहायक भी हो सकता है।

कुल मिलाकर, लालू प्रसाद यादव के इस बयान ने एक बार फिर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जेड-प्लस सुरक्षा और बंगले के मुद्दे को एक साथ जोड़कर उन्होंने सरकार पर सीधा हमला बोला है, जिससे यह मामला केवल एक प्रशासनिक निर्णय न रहकर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस पर और अधिक बयानबाजी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

बिहार की राजनीति में नया मोड़?

इस घटनाक्रम से बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आ सकता है। लालू यादव के समर्थक इसे उनकी 'जनता के नेता' की छवि को और मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं। यह मुद्दा बिहार में राजद के चुनावी अभियान को भी नई ऊर्जा दे सकता है, खासकर तब जब पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

सुरक्षा बनाम आवास: एक विरोधाभास

लालू यादव द्वारा उठाया गया सुरक्षा और आवास का विरोधाभास एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। यदि किसी व्यक्ति को सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा की आवश्यकता है, तो क्या उसे रहने के लिए उपयुक्त स्थान भी प्रदान नहीं किया जाना चाहिए? यह मुद्दा भविष्य में अन्य नेताओं के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जहां सुरक्षा प्रोटोकॉल और आवास नीतियों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता होगी।

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Jagraj

Staff Reporter at VG Khabar.

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