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आरएसएस ने कहा- चढ़ावा चोरी से रामभक्त आहत: दोषियों को कठोर दंड मिलना चाहिए; विनय कटियार बोले- चंपत राय जेल जा सकते हैं

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के आरोपों ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के बी...

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Author: Jagraj Published: 3 Jul 2026, 4:52 PM Updated: 5 Jul 2026, 2:52 PM Views: 17
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अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के आरोपों ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के बीच तनाव को उजागर कर दिया है। आरएसएस ने इस मामले पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है, यह कहते हुए कि इस घटना से रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। संघ ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

Photo: _art.vortex_ / Pexels

यह मामला तब और गरमा गया जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक विनय कटियार ने सीधे तौर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर निशाना साधा। कटियार ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया है कि इस मामले में चंपत राय को जेल भी जाना पड़ सकता है, जिससे ट्रस्ट के भीतर गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलते हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चढ़ावे की चोरी और रामभक्तों की भावनाएं

राम मंदिर, जिसे करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक माना जाता है, के चढ़ावे में कथित चोरी की खबर ने पूरे देश के रामभक्तों को स्तब्ध कर दिया है। मंदिर के निर्माण और उसके संचालन के लिए देश-विदेश से करोड़ों रुपये का दान आता है। ऐसे में दान की गई राशि में किसी भी प्रकार की हेराफेरी भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। आरएसएस ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान है।

Photo: Dinesh Kalola / Pexels

संघ ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका मानना है कि इस घटना से मंदिर की पवित्रता पर सवाल उठ रहे हैं और इसे तुरंत संबोधित किया जाना चाहिए। आरएसएस ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने इस कृत्य को अंजाम दिया है, उन्हें कानून के तहत सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि एक स्पष्ट संदेश जाए कि आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विनय कटियार का बयान इस मामले को एक नया मोड़ देता है। उनका यह आरोप कि चंपत राय जेल जा सकते हैं, ट्रस्ट के भीतर की आंतरिक कलह और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। कटियार, जो स्वयं राम मंदिर आंदोलन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं, के ऐसे गंभीर आरोप से मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है। उनके बयान से यह भी संकेत मिलता है कि इस मामले में कुछ बड़े खुलासे हो सकते हैं।

Photo: AHMAD GHANI / Pexels

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए स्थापित किया गया था। इस ट्रस्ट पर देश भर के करोड़ों लोगों का विश्वास टिका हुआ है। ऐसे में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर इस तरह के आरोप लगना उसकी विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रस्ट इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या कोई आंतरिक जांच शुरू की जाती है।

राजनीतिक और धार्मिक निहितार्थ

इस घटना के राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों में गहरे निहितार्थ हैं। राजनीतिक रूप से, यह भाजपा के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन सकता है, क्योंकि राम मंदिर का निर्माण पार्टी के प्रमुख चुनावी वादों में से एक रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर सकता है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। धार्मिक रूप से, यह घटना हिंदू समुदाय के भीतर विभाजन पैदा कर सकती है और मंदिर के प्रति लोगों के विश्वास को हिला सकती है।

आरएसएस और विहिप के बीच संबंध हमेशा से जटिल रहे हैं। हालांकि दोनों संगठन हिंदुत्व के एजेंडे पर काम करते हैं, लेकिन कई मुद्दों पर उनके बीच मतभेद भी सामने आते रहे हैं। चढ़ावे की चोरी का यह मामला एक बार फिर इन मतभेदों को सार्वजनिक मंच पर ले आया है। आरएसएस का कठोर रुख यह दर्शाता है कि वह इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा, भले ही इसमें उसके सहयोगी संगठन के पदाधिकारी शामिल हों।

इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाना न केवल न्याय के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राम मंदिर की पवित्रता और उसके प्रति लोगों के विश्वास को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। सरकार और ट्रस्ट दोनों पर यह जिम्मेदारी है कि वे इस मामले को पूरी पारदर्शिता के साथ संभालें और सभी आरोपों का संतोषजनक जवाब दें।

आगे आने वाले दिनों में इस मामले में कई और खुलासे होने की संभावना है। विनय कटियार के बयान के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य नेता भी इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करते हैं और क्या ट्रस्ट के भीतर से कोई और जानकारी सामने आती है। रामभक्त इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं और उन्हें उम्मीद है कि न्याय होगा और उनके आस्था के केंद्र की पवित्रता बनी रहेगी।

इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित किया है। बड़े पैमाने पर दान प्राप्त करने वाले मंदिरों और ट्रस्टों को अपनी वित्तीय प्रक्रियाओं में अत्यधिक सावधानी और पारदर्शिता बरतनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के संदेह या आरोप से बचा जा सके। यह घटना एक वेक-अप कॉल के रूप में काम कर सकती है ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके।

कुल मिलाकर, अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मामला एक गंभीर मुद्दा है जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। आरएसएस का बयान और विनय कटियार के आरोप इस बात का संकेत हैं कि यह मामला केवल एक छोटी-मोटी अनियमितता नहीं है, बल्कि इसमें गहरे निहितार्थ हैं जिन्हें गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

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Staff Reporter at VG Khabar.

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