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उद्धव गुट को बड़ा झटका: 9 में से 6 सांसद बागी, संजय राउत ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में दी गालियाँ

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट को उस समय एक बड़ा झटका लगा जब उसके नौ लोकसभा ...

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Author: Jagraj Published: 4 Jul 2026, 4:18 PM Updated: 16 Aug 2026, 2:56 AM Views: 10
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट को उस समय एक बड़ा झटका लगा जब उसके नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

Photo: Sandeep Kashyap / Pexels

यह बगावत तब सामने आई जब बागी सांसदों ने पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के खिलाफ अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त की और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ संभावित विलय की अटकलों को हवा दी। इन छह सांसदों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वे पार्टी के मौजूदा नेतृत्व की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं और उन्हें लगता है कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, उद्धव गुट के प्रमुख नेता और प्रवक्ता संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी सारी मर्यादाएं लांघ दीं। उन्होंने बागी सांसदों और उनके कथित समर्थकों के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। राउत के इस व्यवहार ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं और उनकी आलोचना की जा रही है।

Photo: Sandeep Kashyap / Pexels

संजय राउत की इस अभद्र टिप्पणी ने न केवल पार्टी की छवि को धूमिल किया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि पार्टी के भीतर तनाव अपने चरम पर है। उनके बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि उद्धव गुट इस बगावत से कितना परेशान और हताश है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राउत का यह व्यवहार उनकी पार्टी के लिए और भी मुश्किलें पैदा कर सकता है।

यह घटनाक्रम चार साल पहले एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह की याद दिलाता है, जब शिंदे ने 39 विधायकों के साथ उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत की थी। उस समय भी उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और महा विकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी। शिंदे ने तब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर नई सरकार बनाई थी।

Photo: Sandeep Kashyap / Pexels

वर्तमान बगावत में, बागी सांसदों ने शिंदे गुट के साथ अपनी निकटता के संकेत दिए हैं। यह संभावना जताई जा रही है कि ये सांसद जल्द ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं, जिससे उद्धव गुट को लोकसभा में अपनी उपस्थिति और प्रभाव दोनों में भारी नुकसान होगा।

इस टूट का महाराष्ट्र की आगामी राजनीति पर गहरा असर पड़ना तय है। विशेष रूप से मुंबई और ठाणे जैसे क्षेत्रों में, जहाँ शिवसेना का पारंपरिक रूप से मजबूत जनाधार रहा है, इस विभाजन से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। भाजपा और शिंदे गुट इस स्थिति का फायदा उठाने की पूरी कोशिश करेंगे।

उद्धव ठाकरे के लिए यह एक और बड़ी चुनौती है। उन्हें न केवल अपनी पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें अपने जनाधार को भी बनाए रखना होगा। इस बगावत से उनकी नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

यह भी देखना दिलचस्प होगा कि महा विकास अघाड़ी के अन्य घटक दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस, इस स्थिति पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या वे उद्धव ठाकरे का समर्थन जारी रखेंगे या इस नई राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अपने विकल्पों पर विचार करेंगे?

संजय राउत के विवादास्पद बयान ने इस पूरे मामले को और भी उलझा दिया है। जहां एक ओर यह उद्धव गुट के अंदरूनी तनाव को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह विपक्ष को उन पर हमला करने का एक और मौका देता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राउत को अपने शब्दों पर नियंत्रण रखना चाहिए था, खासकर ऐसे नाजुक समय में।

आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि उद्धव ठाकरे इस संकट से कैसे निपटते हैं। क्या वे बागी सांसदों को वापस लाने में सफल होंगे या उन्हें एक और बड़े विभाजन का सामना करना पड़ेगा? महाराष्ट्र की राजनीति में अगले कुछ हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

इस बीच, एकनाथ शिंदे और भाजपा खेमा इस घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है। उनके लिए यह उद्धव गुट को और कमजोर करने और अपनी स्थिति को मजबूत करने का एक सुनहरा अवसर है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि महाराष्ट्र में सत्ता का संतुलन एक बार फिर बदल सकता है।

कुल मिलाकर, उद्धव ठाकरे के लिए यह एक कठिन समय है, और उन्हें अपनी पार्टी और अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। इस बगावत का परिणाम महाराष्ट्र की राजनीति में दूरगामी प्रभाव डालेगा।

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Staff Reporter at VG Khabar.

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